भारत में 25 मार्च (बुधवार) से 21 दिनों का लॉकडाउन शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को राष्ट्र के संबोधित करते हुए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी। लॉकडाउन के दौरान लोगों को घर से बाहर नहीं निकलने के लिए कहा गया है और सड़क, रेल और हवाई सेवाएं स्थगित रहेंगी। मेडिकल सेवाएं 24 घंटे चालू रहेंगी। लोगों तक खाने-पीने के सामान पहुंचाने के लिए सरकार की तैयारी पूरी है।
लॉकडाउन से थमेगा कोरोना वायरस का प्रसार


मेडिकल एक्सपर्ट का कहना है कि 21 दिनों के लॉकडाउन का फैसला बहुत सही है। कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड (वायरस से संक्रमित होने और लक्षण दिखने का समय) 14 दिनों का है। 14 दिन के अंदर कभी भी इसके संक्रमण का पता चल सकता है। उशके बाद 5-7 दिन तक ये दूसरों को फैला सकता है।

द टेलीग्राफ में छपी रिपोर्ट के अनुसार, इस नजरिए से लॉकडाउन को देखें तो 14वें दिन या 7 अप्रैल 2020 तक कोविड-19 के संक्रमित अधिकतर मरीजों का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा सिर्फ उन्हीं व्यक्तियों को संक्रमित होने का खतरा रहेगा जिनके परिवार का कोई सदस्य कोरोना वायरस से पीड़ित है। लॉकडाउन का मुख्य उद्देश्य कोरोना वायरस के प्रसार का रोकना यानि तीसरे स्टेज तक नहीं जाने देना का है। साथ ही इस वायरस के ट्रांसमिशन को रोक देना है। इंडियन मेडिकल रिसर्च काउंसिल ने भी कहा कि लॉकडाउन से 62 से 89 फीसदी तक कोरोना वायरस के प्रसार को रोका जा सकता है।

कोरोना वायरस से निपटने के लिए नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू

भारत में कोरोना वायरस से निपटने के लिए पहली बार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कानून (NDMA) लागू किया गया है। इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान प्रशासन एपिडेमिक डिजीज एक्ट, आईपीसी और सीआरपीसी के तहत भी कार्रवाई कर रहा है। 

भारत में कोरोना वायरस के 600 से ज्यादा मामले

भारत में कोरोना वायरस के पहले मरीज का पता फरवरी में केरल राज्य में चला। यहां के तीन मेडिकल छात्र चीन के वुहान शहर आए थे। सबसे ज्यादा कोरोना वायरस के मरीज महाराष्ट्र और उसके बाद केरल में पाए गए हैं।

कई देशों में हुआ लॉकडाउन

कोरोना वायरस की शुरुआत दिसंबर 2019 में चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान शहर से हुई थी। चीन में सबसे ज्यादा मौतें इसी शहर में हुई है। दुनिया में सबसे पहले वुहान शहर को ही लॉकडाउन किया गया है। इसके बाद अमेरिका, इटली, फ्रांस, आयरलैंड, ब्रिटेन, डेनमार्क, न्यूजीलैंड, पोलैंड और स्पेन में बी कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए इस तरह का कदम उठाया गया।